Tuesday, 30 August 2011

यह दुनिया तुम्हारे हाथों पर टिकी है, गाय, बैल की सिंगों पर नहीं

‘वरिष्ठ लेखक व साहित्यकार शंकर पुणताम्बेकर की एक लघु कथा हैं- ‘नाव चली जा रही थी। मझदार में नाविक ने कहा- नाव में बोझ ज्यादा है। कोई एक आदमी कम हो जाए तो अच्छा। नहीं तो नाव डूब जाएगी। अब कम हो जाए तो कौन हो जाए, कई लोग तो तैरना नहीं जानते थे। जो जानते थे। उसके लिए भी परले जाना खेल नहीं था। नाव में सभी प्रकार के लोग थे। डाक्टर, अफसर, वकील, व्यापारी, उद्योगपति, पुजारी, नेता के अलावा एक आम आदमी भी। डाक्टर, वकील, व्यापारी ये सभी चाहते थे कि आम आदमी पानी में कूद जाए। वह तैरकर पार जा सकता है, हम नहीं। उन्होंने आम आदमी से कूद जाने को कहा, तो उसने मना कर दिया।

बोला मैं जब डूबने को हो जाता हूं तो आप में से कौन मेरी मदद को दौड़ता है, जो मैं आपकी बात मानूं। जब आम आदमी काफी मनाने के बाद भी नहीं माना तो ये लोग नेता के पास गए, जो इन सबसे अलग एक तरफ बैठा हुआ था। इन्होंने सब-कुछ नेता को सुनाने के बाद कहा-आम आदमी हमारी बात नहीं मानेगा तो हम उसे पकड़कर नदी में फेंक देंगे। नेता ने कहा, नहीं-नहीं, ऐसा करना भारी भूल होगी। आम आदमी के साथ अन्याय होगा। मै देखता हूं उसे। मैं भाषण देता हूं। तुम लोग भी उसके साथ सुनो। नेता ने जोशीला भाषण आरम्भ किया जिसमें राष्ट्र, देश, इतिहास, परम्परा की गाथा गाते हुए देश के लिए बलि चढ़ जाने के आह्वान में हाथ ऊंचा कर कहा, हम मर मिटेंगे लेकिन अपनी नैया नहीं डूबने देंगे, नहीं डूबने देंगे, नहीं डूबने देंगे। सुनकर आम आदमी इतना जोश में आया कि वह नदी में कूद पड़ा और, नाव डूबने से बच गई।’

यह कथा आज के संदर्भ में आम आदमी की करूण गाथा को चित्रित करती है। ऐसी ही तस्वीर आज कुछ हमारे देश की भी है। वह बचना चाहता है तो लोग उसे डुबाना चाहते हैं। आज आम आदमी की बात सभी करते हैं। नेता, मीडिया, व्यापारी सभी। आम आदमी न हो तो देश का काम ही नहीं चल सकता। आम आदमी के हित के बारे में सभी सोचते हैं। वह आम आदमी ही है जो देश की सरकार बनाता है, सरकार गिराता है। वही है जो फैक्ट्रियों में हाड़-तोड़ मेहनत करता है। वह भी है जो खेतों में अनाज पैदा करता है और देश के और लोगों को खिलाने के लिए अपनी उपज मंडियों में दे आता है। आम आदमी की महत्ता के बारे में सोचा जाए तो कोई भी ऐसा काम नहीं है जो बिना उसके संपन्न हो सके। आम आदमी न हो तो रईशों की रईशी रह सकती है, न अमीरों की अमीरी, न ही चल सकती है नेताओं की राजनीति। यानी कि देश का सब कुछ यदि ठीक-ठाक चल रहा है तो आम आदमी के मजबूत कंधों पर।

आम आदमी ही है जो सभी को शांति प्रदान करता है। वह तमाम समस्याओं की जड़ भी है और समाधान भी लेकिन इस आम आदमी की सच्ची तस्वीर कोई देखना ही नहीं चाहता। सत्ता के गलियारों में आम आदमी की खूब चर्चा होती है। सरकारों की तमाम योजनाएं आम आदमी के लिए बनती हैं। देश का बजट तैयार होता है तो उसमें सबसे ज्यादा यदि किसी का ध्यान रखा जाता है तो वह आम आदमी ही है। बजट ही उसके लिए बनता है। आम आदमी आज सबकी दुकानदारी चला रहा है। सबका टारगेट आम आदमी है, फिर भी वह किसी के टारगेट पर नहीं है। वह हर जगह छला जा रहा है। आम आदमी के मेहनती हाथों पर ही यह दुनिया टिकी हुई है।

तुर्की के प्रसिद्ध कवि नाजिम हिकमत की आम जनता को संबोधित एक कविता है- तुम्हारे हाथ और उनके झूठ। जिसमें कहा गया है कि यह दुनिया तुम्हारे हाथों पर टिकी है, गाय, बैल की सिंगों पर नहीं। इस संवेदनशील जनवादी कविता में आम आदमी की आशा और आकांक्षाओं को उसके श्रमिक हाथों की बुनियाद पर उकेरा गया है। इसी तरह मुंशी प्रेमचंद के घीसू और माधव तथा होरी के जिंदगी में आजादी के लंबे अर्से बाद भी सवेरा कहां आ पाया है। आम आदमी के प्रति संवेदनहीनता कम होने के बजाए बढ़ती ही जा रही है। आज जिनके कंधों पर यह जिम्मेदारी है, वे ही गैर जिम्मेदारी निभाते हुए जिम्मेदारी का आवरण ओढ़े सुख भोगते फिर रहे हैं। राजनीति में अनेक विसंगतियां दिखाई देती हैं। आम आदमी की बात करने वाले नेता उससे इतनी दूरी बनाकर रखते हैं, जहां से वह दिखाई तो देता है लेकिन उसकी आवाज वहां तक नहीं पहुंचती। इसके लिए अब मध्यस्थ की जरूरत पड़ने लगी है। इस मध्यस्थता ने ही आम आदमी को सबसे ज्यादा छला है। आम आदमी की बात करने वाले नेता के सामने ही उसके हितों की बलि चढ़ाई जा रही है। नाव से कूद जाने की परिस्थितियां उत्पन्न की जा रही हैं।

आम आदमी के लिए जिस आदर्श की बात की जाती है, वे आदर्श ही खोखले और अनैतिक नजर आते हैं। ऐसे में उसके सामने समाज और देश की कैसी तस्वीर उभर सकती है। भरोसा यह है कि वही इन परिस्थितियों से उबारने में सक्षम है लेकिन वह विवश है गहरे पानी में कूद जाने को। देखा जाए तो आज जो कुछ चल रहा है, उसके पीछे आम आदमी की ताकत ही है। अस्पताल, कालेज, मंड़ी सब कुछ। भ्रष्टाचार, आतंक, गरीबी, भुखमरी जैसे अनेक थपेड़े उस पर रोज पड़ रहे हैं। आज वह इनसे खुद को टूटा हुआ महसूस करने लगा है इसी बीच एक आवाज आती है अन्ना हजारे की। उस आवाज में आम आदमी को अपनी आवाज सुनाई देती है तो वह उस आवाज में अपनी आवाज मिलाने बैठ जाता है। यह तारतम्य कब तक बना रहेगा, उसे भी नहीं पता।

बात मीडिया की करते हैं तो आम आदमी वहां भी छला जाता दिखाई देता है। वहां पहले भी आम आदमी की बात की जाती थी और आज भी। बस उसका नजरिया बदल गया है। जबसे मीडिया का नजरिया बदला है, तबसे आम आदमी भी उसे दूसरी नजर से देखने लगा है। अब मीडिया आम आदमी को एक बाजार के रूप में देखने लगा है। यह आम आदमी का अधुनातन रूप है। वह आज एक सवाल बन गया है। ऐसा सवाल जिसका हल भी वह खुद है। आम आदमी तो अर्से से नैया न डूबने देने की कोशिश में अपने को कुर्बान करता आ रहा है लेकिन जो समर्थ और खास लोग हैं, वे उस कुर्बानी को भी स्वा

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Tuesday, 23 August 2011

अन्‍ना के अनशन को देख रामदेव को याद आये अपने घाव (ANKUR SHARMA)

समाजसेवी और गांधीवादी अन्‍ना हजारे के आंदोलन में समर्थकों का सैलाब देखकर योग गुरु बाबा रामदेव को अपने अनशन की याद आ गई। बाबा रामदेव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके अनशन के समय सरकार ने आंसू गैस के गोले और लाठियां बरपायी थी। बाबा रामदेव ने कहा कि यह सारी चीजें सरकार पर निर्भर है मगर उन सबके बाद भी बाबा रामदेव अन्‍ना हजारे के साथ है
news express
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Sunday, 21 August 2011

अण्णा ने जगाई राष्ट्रभक्ति की अलख (Ankur Sharma)

 (लिमटी खरे)
इस साल तो गजब ही हो गया। स्वाधीनता दिवस बीत गया और आज भी राष्ट्र भक्ति के गीतों का जादू सर चढ़कर बोल रहा है। वरना गणतंत्र दिवस, स्वाधीनता दिवस और गांधी जयंती पर ही सुनाई देते रहे हैं देशप्रेम के गाने। किशन बाबू राव का शुक्रिया अदा किया जाना चाहिए कम से कम उन्होंने आजादी के मतवालों को भूल चुकी इक्कीसवीं सदी की युवा पीढी को उससे रूबरू करवाने का प्रयास तो किया। आज रामलीला मैदान में देश प्रेम के गाने गूंज रहे हैं, जो पंद्रह दिनों तक लगातार बजने की उम्मीद है। युवाओं को सड़कों पर आते देख राजनैतिक दलों की घिघ्घी सी बंधी दिख रही है। सभी इस वोट बैंक को हथियाने पर आमदा दिख रहा है। देश प्रेम के इंजेक्शन अगर इसी तरह से लगते रहे तो इक्कीसवीं सदी में भारत की तस्वीर कुछ और ही नजर आएगी। गांधीवादी अण्णा के पहनावे को देखकर लगता है मानो इक्कीसवीं सदी में भारत को नई राह दिखाने वाला गांधी मिल गया है। फर्क महज इतना ही है कि उस वक्त महात्मा गांधी ने गोरे ब्रितानी विदेशियों के खिलाफ जेहाद छेड़ी थी, पर आज अण्णा की जेहाद अपनों से है।

लगभग दो दशकों से देश प्रेम और राष्ट्रभक्ति के मायने 15 अगस्त, 26 जनवरी और गांधी जयंती में तब्दील हो गए थे। देशवासी इन तीन दिनों में ही देश प्रेम की बात करते नजर आते। सूरज के सर पर आते ही देश भक्ति के गानों का स्थान पॉप साग्स ले लिया करते। लगभग दो दशकों बाद यह मौका नजर आ रहा है कि पंद्रह अगस्त बीतने के बाद भी लगातार ही देश भक्ति की अलख जगी हुई है। इसका श्रेय जाते है गांधीवादी विचारधारा के सच्चे अनुयायी किशन बाबूराव यानी अण्णा हजारे को। अण्णा ने अपने अंिहसक तरीके से देश को एक सूत्र में पिरो दिया है।

कितने जतन के बाद भारत देश में 15 अगस्त 1947 को आजादी का सूर्योदय हुआ था। देश को आजाद कराने, न जाने कितने मतवालों ने घरों घर जाकर देश प्रेम का जज्बा जगाया था। सब कुछ अब बीते जमाने की बातें होती जा रहीं हैं। आजादी के लिए जिम्मेदार देश देश के हर शहीद और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की कुर्बानियां अब जिन किताबों में दर्ज हैं, वे कहीं पडी धूल खा रही हैं। विडम्बना तो देखिए आज देशप्रेम के ओतप्रोत गाने भी बलात अप्रसंगिक बना दिए गए हैं। महान विभूतियों के छायाचित्रों का स्थान सचिन तेंदुलकर, अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार जैसे आईकान्स ने ले लिया है। देश प्रेम के गाने महज 15 अगस्त, 26 जनवरी और गांधी जयंती पर ही दिन भर और शहीद दिवस पर आधे दिन सुनने को मिला करते हैं।

गौरतलब होगा कि आजादी के पहले देशप्रेम के जज्बे को गानों में लिपिबद्ध कर उन्हें स्वरों में पिरोया गया था। इसके लिए आज की पीढी को हिन्दी सिनेमा का आभारी होना चाहिए, पर वस्तुतः एसा है नहीं। आज की युवा पीढी इस सत्य को नहीं जानती है कि देश प्रेम की भावना को व्यक्त करने वाले फिल्मी गीतों के रचियता एसे दौर से भी गुजरे हैं जब उन्हें ब्रितानी सरकार के कोप का भाजन होना पडा था।

देखा जाए तो देशप्रेम से ओतप्रोत गानों का लेखन 1940 के आसपास ही माना जाता है। उस दौर में बंधन, सिकंदर, किस्मत जैसे दर्जनों चलचित्र बने थे, जिनमें देशभक्ति का जज्बा जगाने वाले गानों को खासा स्थान दिया गया था। मशहूर निदेशक ज्ञान मुखर्जी द्वारा निर्देशित बंधन फिल्म संभवतः पहली फिल्म थी जिसमें देशप्रेम की भावना को रूपहले पर्दे पर व्यक्त किया गया हो। इस फिल्म में जाने माने गीतकार प्रदीप (रामचंद्र द्विवेदी) के द्वारा लिखे गए सारे गाने लोकप्रिय हुए थे। कवि प्रदीप का देशप्रेम के गानों में जो योगदान था, उसे भुलाया नहीं जा सकता है।

इसके एक गीत ‘‘चल चल रे नौजवान‘‘ ने तो धूम मचा दी थी। इसके उपरांत रूपहले पर्दे पर देशप्रेम जगाने का सिलसिला आरंभ हो गया था। 1943 में बनी किस्मत फिल्म के प्रदीप के गीत ‘‘आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है, दूर हटो ए दुनिया वालों हिन्दुस्तान हमारा है‘‘ ने देशवासियों के मानस पटल पर देशप्रेम जबर्दस्त तरीके से जगाया था। लोगों के पागलपन का यह आलम था कि लोग इस फिल्म में यह गीत बारंबार सुनने की फरमाईश किया करते थे।

आलम यह था कि यह गीत फिल्म में दो बार सुनाया जाता था। उधर प्रदीप के क्रांतिकारी विचारों से भयाक्रांत ब्रितानी सरकार ने प्रदीप के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया, जिससे प्रदीप को कुछ दिनों तक भूमिगत तक होना पडा था। पचास से साठ के दशक में आजादी के उपरांत रूपहले पर्दे पर देशप्रेम जमकर बिका। उस वक्त इस तरह के चलचित्र बनाने में किसी को पकडे जाने का डर नहीं था, सो निर्माता निर्देशकों ने इस भावनाओं का जमकर दोहन किया।

दस दौर में फणी मजूमदार, चेतन आनन्द, सोहराब मोदी, ख्वाजा अहमद अब्बास जैसे नामी गिरमी निर्माता निर्देशकों ने आनन्द मठ, लीजर, सिकंदरे आजम, जागृति जैसी फिल्मों का निर्माण किया जिसमें देशप्रेम से भरे गीतों को जबर्दस्त तरीके से उडेला गया था। 1962 में जब भारत और चीन युद्ध अपने चरम पर था, उस समय कवि प्रदीप द्वारा मेजर शैतान सिंह के अदम्य साहस, बहादुरी और बलिदान से प्रभावित हो एक गीत की रचना में व्यस्त थे, उस समय उनका लिखा गीत ‘‘ए मेरे वतन के लोगों, जरा आंख मंे भर लो पानी . . .‘‘ जब संगीतकार ए.रामचंद्रन के निर्देशन में एक प्रोग्राम में स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने सुनाया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी अपने आंसू नहीं रोक सके थे।

इसी दौर में बनी हकीकत में कैफी आजमी के गानों ने कमाल कर दिया था। इसके गीत कर चले हम फिदा जाने तन साथियो को आज भी प्रोढ हो चुकी पीढी जब तब गुनगुनाती दिखती है। सत्तर से अस्सी के दशक में प्रेम पुजारी, ललकार, पुकार, देशप्रेमी, कर्मा, हिन्दुस्तान की कसम, वतन के रखवाले, फरिश्ते, प्रेम पुजारी, मेरी आवाज सुनो, क्रांति जैसी फिल्में बनीं जो देशप्रेम पर ही केंदित थीं।

वालीवुड में प्रेम धवन का नाम भी देशप्रेम को जगाने वाले गीतकारों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। उनके लिखे गीत काबुली वाला के ए मेरे प्यारे वतन, शहीद का ए वतन, ए वतन तुझको मेरी कसम, मेरा रंग दे बसंती चोला, हम हिन्दुस्तानी का मशहूर गाना छोडो कल की बातें कल की बात पुरानी, महान गायक मोहम्मद रफी ने देशप्रेम के अनेक गीतों में अपना स्वर दिया है। नया दौर के ये देश है वीर जवानों का, लीडर के वतन पर जो फिदा होगा, अमर वो नौजवां होगा, अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं . . ., आखें का उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता. . ., ललकार का आज गा लो मुस्करा लो, महफिलें सजा लो, देश प्रेमी का आपस में प्रेम करो मेरे देशप्रेमियों, आदि में रफी साहब ने लोगों के मन में आजादी के सही मायने भरने का प्रयास किया था।

गुजरे जमाने के मशहूर अभिनेता मनोज कुमार का नाम आते ही देशप्रेम अपने आप जेहन में आ जाता है। मनोज कुमार को भारत कुमार के नाम से ही पहचाना जाने लगा था। मनोज कुमार की कमोबेश हर फिल्म में देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत गाने हुआ करते थे। शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम, क्रांति जैसी फिल्में मनोज कुमार ने ही दी हैं।
अस्सी के दशक के उपरांत रूपहले पर्दे पर शिक्षा प्रद और देशप्रेम की भावनाओं से बनी फिल्मों का बाजार ठंडा होता गया। आज फूहडता और नग्नता प्रधान फिल्में ही वालीवुड की झोली से निकलकर आ रही हैं। आज की युवा पीढी और देशप्रेम या आजादी के मतवालों की प्रासंगिकता पर गहरा कटाक्ष कर बनी थी, लगे रहो मुन्ना भाई, इस फिल्म में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के बजाए शुष्क दिवस (इस दिन शराब बंदी होती है) के रूप में अधिक पहचाना जाता है। विडम्बना यह है कि इसके बावजूद भी न देश की सरकार चेती और न ही प्रदेशों की।

हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं कि भारत सरकार और राज्यों की सरकारें भी आजादी के सही मायनों को आम जनता के मानस पटल से विस्मृत करने के मार्ग प्रशस्त कर रहीं हैं। देशप्रेम के गाने 26 जनवरी, 15 अगस्त के साथ ही 2 अक्टूबर को आधे दिन तक ही बजा करते हैं। कुल मिलाकर आज की युवा पीढी तो यह समझने का प्रयास ही नहीं कर रही है कि आजादी के मायने क्या हैं, दुख का विषय तो यह है कि देश के नीति निर्धारक भी उन्हें याद दिलाने का प्रयास नहीं कर रहे हैं।

आज अण्णा हजारे को सलाम किया जाना चाहिए कि उन्होंने 74 साल की उम्र में वह कर दिखाया जो कोई भी सियासी दल नहीं कर सका। अण्णा के साथ कांधे से कांधा मिलाकर देशवासी चल रहे हैं, उनके निशाने पर है भ्रष्टाचार। सरकार जिस भ्रष्टाचार को समाप्त नहीं कर पा रही है उसे समाप्त करने का बीड़ा उठाया है अण्णा हजारे ने। देश के निर्दयी, नपुंसक, निष्प्रभावी शासकों ने देश की जनता को तहे दिल से लूटा है। अपनी सुख सुविधाओं के लिए तबियत से खजाने को खाली किया है। वहीं दूसरी ओर गांधीवादी अण्णा के पहनावे को देखकर लगता है मानो इक्कीसवीं सदी में भारत को नई राह दिखाने वाला गांधी मिल गया है। फर्क महज इतना ही है कि उस वक्त महात्मा गांधी ने गोरे ब्रितानी विदेशियों के खिलाफ जेहाद छेड़ी थी, पर आज अण्णा की जेहाद अपनों से है।


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Saturday, 20 August 2011

फाजिल्का के बढ़ परभावित गावँ खली करने के आदेश

फाजिल्का  के इंडो - पका बोर्डर के गावों बढ़  का खतरा, परशासन ने दिए गावँ खली करने के आदेश,
किश्ती चला  ADC   पहुंचे गावँ में 

अंकुर शर्मा 
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Thursday, 18 August 2011

Today Join Manav Ekta Manch In support of Anna Hazare

Today Manav Ekta Manch is Going to do a candle march in support of Anna hazare For lokpal Bill
From-Head Office Near Allahabad Bank Gaushala Road
TO -Roaming Into the Market To Clock Tower
You Are Requested To Join It  If You Are True Indian .....


Monday, 15 August 2011

नया जिला बनने से खुश हैं लोग

 हमारे प्रतिनिधि, अबोहर : फाजिल्का के जिला बनने से लोग काफी खुश हैं। लोगों का कहना है कि जिला मुख्यालय की दूरी कम होने से उनको काफी सुविधा मिलेगी। क्योंकि पहले 150 किलोमीटर दूर फिरोजपुर आने-जाने में उनका काफी समय बबार्द हो जाता था।

विभिन्न विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों का कहना है कि उन्हें मीटिंग आदि में भाग लेने के लिए महीने में कई बार फिरोजपुर जाना पड़ता था। इसके लिए सुबह घर से जल्दी निकलना पड़ता था। वापस आते-आते रात हो जाती थी। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि उन्हें कई बार जिला हैड क्वार्टर जाने पर किराया आदि भी नहीं मिलता था। रात के समय वापस आने पर टैक्सी करवानी पड़ती थी। जिससे काफी परेशानी होती थी। अब जब जिला मुख्यालय की दूरी मात्र तीस किलोमीटर रह गई है तो उनको काफी राहत मिलेगी।

इसके अलावा फाजिल्का के जिला बनने से स्कूली खिलाड़ी भी खुश हैं। खिलाड़ियों के अनुसार उन्हें जिला स्तर पर खेलने के लिए 150 किलोमीटर दूर फिरोजपुर जाना पड़ता था। अब नया जिला बनने से उनको राहत मिलेगी। प्रिंसिपल सुमित कालड़ा का कहना है कि इतनी दूर जाने से खिलाड़ियों खासकर लड़कियों को परेशानी होती थी। अब नया जिला बनने से खिलाड़ियों को भी राहत मिली है।


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अब भारत-पाक बार्डर खुलवाना मिशन : ज्याणी

जासं, फाजिल्का

परिवहन, तकनीकी शिक्षा व औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री एवं स्थानीय विधायक सुरजीत कुमार ज्याणी ने कहा कि उन्होंने चुनाव से पहले किए अपने सारे वादे पूरे कर दिए हैं, यहां तक कि फाजिल्का को जिला बनाने का वादा भी पूरा हो गया है। अब इस इलाके की उन्नति के लिए जरूरी भारत-पाकिस्तान बार्डर व्यापार के लिए खुलवाने की दशकों पुरानी मांग वह राज्य में गठबंधन के साथ केंद्र में एनडीए सरकार आने पर हर हाल में पूरी करवाएंगे। ज्याणी फाजिल्का को जिला बनवाने के बाद पहली बार यहां के सिटी गार्डन पैलेस में पत्रकारों से मुखातिब हुए।

उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले फाजिल्का को जिला बनाने का दावा उन्होंने अपना राजनीतिक करियर दांव पर लगाकर पूरा कर दिया है। अब वह कांग्रेसी नेता भी फाजिल्का को जिला बनाने के संघर्ष में साथ देने की बात कह श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं, जिन्होंने मरणव्रत पर बैठे होने के दौरान उनका हाल तक नहीं पूछा। मरणव्रत स्थल पर आए और नंबर बनाकर चलते बने। लेकिन जनता सब जानती है कि जिले के लिए किसने क्या कुर्बानी दी। अब फाजिल्का में क्या कमी है, पूछने पर ज्याणी ने कहा कि जिला बनने से विकास की राह खुली है, लेकिन विकास फाजिल्का सेक्टर स्थित भारत-पाक सीमा की सादकी बार्डर व्यापार के लिए खुलने पर ही संभव है। क्योंकि यहां कोई बड़ी इंडस्ट्री नहीं है। इसलिए बार्डर का खुलना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने अकाली सांसद शेर सिंह घुबाया से बात कर ली है कि वह संसद के शुरू होने वाले सत्र में इस मुद्दे को उठाएं। इसके अलावा वह खुद भी फाजिल्का से एक शिष्टमंडल को लेकर केंद्रीय नेताओं से मिलेंगे व उनसे पाकिस्तान सरकार के साथ पत्र व्यवहार शुरू करने की मांग करेंगे। उन्होंने फाजिल्का में उच्च शिक्षा के लिए नए डिग्री कालेज जिनमें लड़कियों का कालेज खोलने, यहां से चंडीगढ़ वाया पटियाला बस चलवाने का आश्वासन दिया। इस समय नगर परिषद अध्यक्ष अनिल सेठी, मार्केट कमेटी चेयरमैन अशोक जैरथ, गुरविंदर टिक्का, नवीन कवातड़ा व बलजीत सहोता भी मौजूद थे।


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Plans for digital library remain a distant dream in Fazilka

 Praful C. Nagpal
Fazilka, August 7

The ambitious plan to convert the library of the MR Government College into a digital library, a premier educational institute since the pre-partition days, remains unfulfilled so far. The building of the digital library has not been completed due to paucity of funds even when a sum of Rs 36 lakh had already been spent on the new building of the library.

At present, the library is being run in an old portion of the college building. The library has a total of 22144 books on record but it has no librarian for the past seven years since the retirement of the last incumbent.

Rakesh Saha, a restorer and Junior Lecturer Assistant (JLA) Chuni Lal, working on temporary basis from PTA funds, are managing the library, which has a transaction of around 400 books per day during the academic session. The books are stocked in five-decade-old cupboards. Some of the books are tattered. Recently updated books are seldom added to the library.

With the development of the latest information and technology techniques, the necessity of converting the library into a digital one was felt a long time back.

The University Grant Commission (UGC) in 2009 sanctioned the funds amounting to Rs 36 lakh for the construction of a new double-storeyed block for the digital library. However, due to the escalation of the cost of the project, the building was left incomplete about a year back. As per the contractor Manoj Kumar, the work related to steel railing, plinth protection, boundary wall, aluminum main gate, some electronic equipment, submersible pump motor, water cooler with RO system is yet to be carried out reportedly due to paucity of funds.

Eminent socialite and educationist Raj Kishore Kalra has demanded that requisite funds should be sanctioned to make the project operational. Executive Engineer, PWD, Prem Kumar said at least Rs 10 lakh is required for the completion of library and installation of electronic gadgets.

Hence, the library has still not been handed over to the college authorities. For this reason, the building has virtually become a place of merry making for some anti-social elements.

Tribhuvan Ram, officiating principal of the MR Government College, said the college officials want the library building to be completed soon and its control be assigned to them to ensure its proper functioning and maintenance.

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अबोहर-फाजिल्का के बीच कब चलेगी रेलगाड़ी

 रेलवे की तरफ से फाजिल्का-अबोहर रेल लाइन परियोजना लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन इसमें ओर देरी होने की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि परियोजना के लिए बनाई गई रेल लाइन की अभी तक चैकिंग नहीं हुई और न ही इस पर रेल की स्पीड चैक हुई है। खास बात यह है इसके लिए अभी तक विभाग के लखनऊ स्थित सेफ्टी कमिश्नर ने अभी तक इसकी कोई तिथि घोषित नहीं की गई है, जबकि फिरोजपुर डिविजन की ओर से इस बारे में काफी समय पहले लिखा जा चुका है। इसकी पुष्टि सहायक डीआरएम सुधीर कुमार सिंह ने नार्दर्न रेलवे पैसेंजर्स समिति के पदाधिकारियों से की है। गौर हो कि इसका शिलान्यास एक फरवरी 2004 को तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार ने किया था।
ऊंचे होंगे प्लेटफार्म : समिति के अध्यक्ष डॉक्टर अमर लाल बाघला, महासचिव एडवोकेट बाबू राम, सचिव पूर्ण सिंह सेठी, उपाध्यक्ष राज पाल गुंबर और राजेश कुमार ने बताया कि उन्हें अधिकारियों ने विश्वास दिलाया है कि फाजिल्का से कोटकपूरा तक के सभी रेलवे स्टेशनों के प्लेटफार्मों को जल्दी ऊंचा करवाया जा रहा है। इसके अलावा फाजिल्का स्टेशन पर 1990 में उखाड़ी गई वाशिंग लाइन को फिर से स्थापित करने, फाजिल्का, जलालाबाद, मुक्तसर, कोटकपूरा स्टेशनों पर फुट ओवरब्रिज बनाने आदि की मांग की गई।अबोहरवासी भी चाहते हैं : जल्द चले टे्रन
अबोहर & रेलवे पैसेंजर वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव हनुमान दास गोयल ने रेलवे उच्चाधिकारियों को एक पत्र भेजकर अधर में लटके अबोहर-फाजिल्का रेल निर्माण का कार्य पूरा करके लाइन को शुरू करने की मांग की है। उच्चाधिकारियों को भेजे पत्र में गोयल ने लिखा है कि मंडल रेल प्रबंधक फिरोजपुर ने लगभग एक माह पहले कमिश्नर रेलवे से सेफ्टी को ऊपर लिखित लाइन को टैस्ट करके लागू किए जाने में पत्र लिखा था, लेकिन लखनऊ स्थित रेलवे सेफ्टी विभाग मुख्यालय से अभी तक रेलवे लाइन टैस्ट करने के बारे में कोई पत्र नहीं आया। गोयल ने बताया कि रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष को लगभग एक महीने इस लाइन को आरंभ करने के लिए लगातार पत्र भेजे गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस रेलवे लाइन देशहित में सुरक्षा का काम करेगी, इसलिए इस लाइन को जल्द आरंभ किया जाएगा।ट्रायल खत्म, फिरोजपुर-हैदराबाद ट्रेन बंद
फिरोजपुर & रेलवे द्वारा तीन माह के ट्रायल के तौर पर चलाई गई फिरोजपुर-हैदराबाद ट्रेन को बंद कर दिया है। वीरवार को ट्रेन का ट्रायल पीरियड खत्म हुआ और ट्रायल के अंतिम दिन ट्रेन यहां से रवाना हुई। रेल विभाग सूत्रों अनुसार इस ट्रेन को चलाने से जहां रेलवे को लाभ नहीं पहुंचा, वहीं यात्रियों में भी इस ट्रेन के प्रति क्रेज नहीं देखने को मिला। विभाग की योजना थी कि अगर ट्रेन विभाग एवं यात्रियों के लिए लाभकारी सिद्ध हुई तो इसके ट्रॉयल को एक्सटेंड कर दिया जाएगा, लेकिन तीन माह के दौरान ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।


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पुडा को कारण बताओ नोटिस-Badha Lake Wetland

 अमृत सचदेवा, फाजिल्का

उपमंडल के गांव बाधा के निकट स्थित बाधा झील के किनारे खाली जगह पर पुडा द्वारा कालोनी काटने का पर्यावरण प्रेमियों का विरोध रंग ले आया है। हाईकोट ने इस संबंध में नागरिकों की याचिका को स्वीकार करते हुए पुडा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

गौर हो कि वेटलैंड बाधा झील के किनारे पुडा द्वारा करीब आठ एकड़ जमीन में कालोनी काटे जाने की न केवल घोषणा की गई है, बल्कि कालोनी में काटे जाने वाले प्लाटों का नक्शा समेत उसकी कीमत भी जारी कर दी है। आगामी कुछ दिनों में उस जगह की बोली भी शुरू होने वाली थी। लेकिन फाजिल्का के पर्यावरण प्रेमियों ने बाधा झील का अस्तित्व समाप्त होने की आशंका के मद्देनजर पहले तो पुडा के अधिकारियों से बातचीत का प्रयास किया। लेकिन बात न बनने पर झील को बचाने के लिए संघर्ष कर रही संस्था वेलफेयर एसोसिएशन फाजिल्का के सचिव इंजीनियर नवदीप असीजा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने पुडा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तिथि मुकर्रर की है। याचिका स्वीकार किए जाने पर पर्यावरण प्रेमियों में खुशी की लहर है जबकि झील किनारे प्लाट खरीदने का सपना संजोए बैठे लोगों को निराशा छाई है।


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Thursday, 11 August 2011

SHIROMANI AKALI DAL BADAL FOR UPA GOVT’S NAME IN GUINNESS BOOK OF WORLD RECORD FOR RAMPANT CORRUPTION GADKARI CONFIDENT OF STAGING COME BACK OF SAD-BJP


BADAL FOR UPA GOVT’S NAME IN GUINNESS BOOK OF WORLD RECORD FOR RAMPANT CORRUPTION
 
GADKARI CONFIDENT OF STAGING COME BACK OF SAD-BJP


ANKUR SHARMA
FAZILKA AUGUST 11: Chief Minister Punjab S. Parkash Singh Badal today said Congress led UPA government has surpassed all the records of rampant corruption and it was the most corrupt government in the world which would soon find mention in the ‘Guinness Book of World Record’.
Thousands of people from all walks of life today converged at here the local grain market on the occasion of the thanks giving rally organized by the BJP for the upgradation of Fazilka sub-division as District thereby fulfilling the long pending demand of the local residents. 
            Addressing a mammoth gathering here on the thanks giving rally organized by the BJP after the up-gradation of Fazilka sub-division as new district, S. Badal said UPA government had almost lost the confidence of the public and therefore, it has no moral right to continue in the office. He said scams and scandals were the order of the day in Congress led UPA government. S. Badal said Centre’s gross discrimination and apathetic attitude towards Punjab had virtually reduced our position to beggars. He said our state was being denied its due share in the revenue collected by Centre from the states which was just a mockery on the part of Indian federalism. He said the maladies like unemployment, illiteracy, poverty and inflation had enormously affected the life of common man (Aam Adami) to whom the Congress claimed to be champion for safeguarding his rights but on the contrary it was indulging in sheer exploitation of the common man for its own vested interests. 
            S. Badal further said the SAD-BJP alliance would comfortably repeat the next government in Punjab after the assembly polls.  He appealed the people not to be complacent in their fight both in SGPC general elections and subsequently the assembly elections after two months to ensure the victory of SAD. He said gone were the days when it was a tradition in the state that the ruling party never came in power after assembly polls. He asserted this myth would be proved wrong as SAD--BJP would again form the government in the state as contrary to the tall claims of Congress of routing us from the state politics. He said Congress was living in fool’s paradise if it was still contemplating of winning elections in Punjab despite the fact of rampant corruption and administrative failure at the helm of affairs in Centre. 
            Training guns at Congress leadership in the state, S.Badal said it has been exposed of its double speak being claiming to be secular on one hand and meddling in the Sikh religious affairs on the other.  
            In his address President Shiromani Akali Dal and Deputy Chief Minister S.Sukhbir Singh Badal said the creation of Fazilka as new district was a gift to the residents of this town. He said the people of the area deserved Fazilka to be a district in view of its historic importance and therefore, the Chief Minister generously conceded to the demand raised by the local MLA.  He said SAD-BJP government was sensitized to the problems of people at the grass root levels whereas the Congress never bothered about their genuine problems for the reasons best known to them.  He said SAD-BJP alliance had drawn a roadmap to ensure overall development and prosperity in the state over a period of next 25 years. He pointed out several path breaking initiatives have been taken in the field of power, infrastructure, education and social security and hope Punjab it soon become a power surplus state in the country. He sought support from the people of Punjab to bring SAD-BJP alliance again in power so that the unaccomplished agenda could be implemented in the right earnest. 
            Virtually kick starting his party’s election campaign, the National President of BJP Mr. Nitin Gadkari in his address said the SAD-BJP alliance had ushered an era of overall development and prosperity in the state.  Mr.Gadkari said he was confident that SAD-BJP would repeat government after the forthcoming assembly elections exclusively on the plank of development and performance. 
            Appreciating the efforts of Chief Minister Punjab S. Parkash Singh Badal for giving the status of district to the historic towns of Fazilka and Pathankot had certainly boost the moral of the rank and file of the BJP in the state.  On the other hand, congress had been befooling the people and playing havoc with the sentiments of the local residents by making false promises to accord the status of district to Fazilka.   
            Lambasting at the Congress government at Centre for its involvement in the bungling in CWC, Mr. Gadkari said the organizing committee under the chairmanship of Suresh Kalmadi spent 980 crore on the renovation of Jawaharlal Nehru stadium whereas it merely needed 200 crore for the entire works as pointed by the CAG in its report. 
            Earlier the Local MLA and Transport Minister Mr. Surjit Kumar Jiyanai in his welcome address expressed his gratitude to the Chief Minister for making Fazilka as a district. 
            Prominent amongst others who spoke on the occasion were President State Unit of BJP Punjab Mr. Ashwani Sharma, Incharge Punjab Affairs of BJP Mr. Shanta Kumar, National General Secretary Mr. JP Naddha, Mr. Tikshan Sud and Mr. Arunesh Shakir (both Cabinet Minister), MP Lok Sabha Mr. Sher Singh Gubaya, MP Rajyasabha Mr. Avinash Rai Khanna, CPS Mr. KD Bhandari and former state President of BJP Mr.Brij Lal Rinwa. Senior party leaders and workers of BJP and SAD also present on the occasion


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